Sunday, June 9, 2019

विनाश की क्रान्तियां



🔘हरितक्रान्ति ने हमारी परम्परागत एवं स्वास्थ्यवर्धक कृषि का विनाश किया एवं पृथिवी पर सर्वत्र विष घोला।

🔘श्वेतक्रान्ति ने हमारी देशी नस्ल की गौओं को समाप्त किया एवं विदेशी व संकर नस्ल की गायों के रोगकारक दूध का प्रचार किया।

🔘रेड एवं पिंक क्रान्ति हमारे पालतू पशुओं को मौत के घाट उतार कर हमें क्रूर व मांसाहारी बना रही है।

🔘ब्लू क्रान्ति समुद्री जीवों की हत्या करके समुद्री तूफानों की भयानक्ता को बढ़ा रही है।

🔘रजत क्रान्ति पक्षियों के भ्रूणों (अण्डों) को खाकर पेट को कचरा पात्र बना रही है।

🔘औद्योगिक क्रान्ति सम्पूर्ण पर्यावरण को नष्ट भ्रष्ट करके सम्पूर्ण प्राणिजगत् को विनाश की ओर ले जा रही है।

🔘डिजीटल क्रान्ति सम्पूर्ण स्पेस को प्रदूषित करके जीवों के अस्तित्व के लिए गम्भीर संकट उत्पन्न कर रही है।

ये सभी क्रान्तियां अपने प्राचीन वैदिक ज्ञान-विज्ञान को भूल कर विदेशों की अंधी बौद्धिक दासताजन्य मूर्खता का परिणाम है। हमारा राष्ट्र उस भयानक मार्ग पर चल रहा है, जहाँ मृत्यु के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। वस्तुतः जब तक ऋषियों की वेदोक्त महती विद्या का अनुसंधान, प्रचार व प्रसार नहीं होगा, तब तक केवल भारत ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व नाना प्रकार के रोग, अपराध एवं प्राकृतिक प्रकोपों के भयंकर जाल में फंस कर सम्पूर्ण विनाश के भयानक मार्ग पर चलता ही रहेगा। इसलिए आओ! प्यारे मानव! वेद पर चल कर विश्व-मानवता के जीवन को बचाने का संकल्प करें। सम्पूर्ण व्यवस्था को बदलने के लिए पूर्ण पुरुषार्थ करें। वैदिक मार्ग के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं। आज कोई सोचने के लिए तैयार नहीं कि भारत के प्राचीन ज्ञान-विज्ञान पर गम्भीर अनुसंधान करके भारत के आर्थिक वैभव को प्राप्त करने का प्रयास किया जा सकता है।

✍ आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक

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